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आम के एक ही पेड़ पर 22 वैरायटी के आम की खेती

आम के एक ही पेड़ पर 22 वैरायटी के आम की खेती

महज आम की पैदावार से 50 लाख की सालाना कमाई।

महाराष्ट्र के सांगली जिले के जत तालुका के अंतराल गांव में पैदा होते है,ये आम।

कभी ऑटो मैकेनिक रहे काकासाहेब सावंत आज महारास्ट्र ही नही बल्कि देश भर के किसानों के लिए एक रोल -मॉडल बन गए है।दरअसल काका साहेब सावंत ने आम का एक बगीचा लगाया है,जिससे इनके लगाये गये एक ही आम के पेड़ पर 22 अलग -अलग वैरायटी के आम पैदा होते है और इस पैदावार से सावंत सालाना 50 लाख तक कि कमाई करते है।

43 वर्षीय काकासाहेब सावंत कभी ऑटोमोबाइल क्षेत्र में बतौर मैकेनिक हुआ करते थे,लेकिन इन दिनों काकासाहेब की पहचान एक सफल किसान के रूप में सिर्फ महारास्ट्र में ही नही बल्कि देश भर में हो रही है। काकासाहेब महारास्ट्र के सांगली जिले के जत तालुका के रहनेवाले है।यह तालुका एक सूखा ग्रस्त इलाका है और इसी सूखाग्रस्त तालुका के अंतराल गाँव के रहनेवाले है,काकासाहेब सावंत ।

ऑटो-मैकेनिक क्षेत्र छोड़ने के बाद काका साहेब सीधे अपने गांव पहुंचे और खेती करने लगे। काकासाहेब ने यहां वनशंकरी के नाम से एक नर्सरी शुरू की। इस तालुका की खेती प्रकृति पर निर्भर रहती है। इसके बावजूद काकासाहेब सावंत ने बड़ी लगन के साथ ये नर्सरी शुरू की और इसी नर्सरी से काकासाहेब सावंत सालाना 50 लाख रुपये कमाते हैं।

दरसल काकासाहेब सावंत ने अपने नर्सरी में एक 3 साल पुराने आम के पेड़ पर एक प्रयोग किया।जिसमे सावंत ने 22 तरह के अलग – अलग आम की पैदावार की।इस आम की पैदावार में सबसे खास बात ये रही ,की काकासाहेब सावंत के किसानी जीवन का किया गया ये पहला प्रयोग पूरी तरह से सफल रहा।

पुणे में कई ऑटोमोबाइल कंपनियों में एक दशक तक काम करने के बाद खेती की तरफ रुख करना काकासाहेब सावंत के लिए एक वरदान साबित हुआ।जो लोग कभी उन पर हंसते थे। अब वही ही उनसे खेती के गुर सीखने के लिए उनके पास आते है।एक वक्त वो था,की जब काकासाहेब सांवत शुरूवाती दिनों में आम के पौधे लगा रहे थे,तब उन पर कई लोग हंसा करते थे,लेकिन आज उन सभी के सामने काकासाहेब एक मिशाल के रूप में सामने खड़े है।

एक वक्त वो भी था ,की काकासाहेब जिस क्षेत्र में रहते है। वहां पर आम की पैदावार नहीं होती थी। लोगों का मानना था, कि कोंकण में ही बढिय़ा हापुस आम हो सकता है। लेकिन काकासाहब की मेहनत ने उनसारे सवालो को मात दे दी।

आईटीआई से डिप्लोमा करनेवाले 43 वर्षीय काकासाहेब सावंत ने साल 2010 में आम का बगीचा लगाया। इसके बाद उन्हें पांच साल बाद व्यापार के अवसर दिखने लगे।

10 एकड़ में आम के पेड़, तो 10 एकड़ में चीकू लगाते है। इसके अलावा दूसरे फलों की भी खेती करते है। आज वह दूसरे किसानों के लिए रोल मॉडल बन गए है। उन्होंने 25 लोगों को अपने यहां रोजगार दिया है। नर्सरी से लेकर दूसरे पैक हाउस बनाने में सरकार की सब्सिडी भी इन्हें मिलती है।सावंत हर साल करीब 2 लाख आम के पौधे भी बेचते है। जिनमे यह अलग अलग वैरायटी के आम आते है।

इस साल काकासाहेब ने अपनी नर्सरी में केसर के आम के पौधे लगाए। हर पौधे को 40 से 70 रुपये में बेचा जाता है। सावंत हर साल लगभग 2 लाख आम के पौधे बेचते हैं। इसके अलावा वे एक लाख कस्टर्ड सेब, रतालू, चीकू, नींबू आदि भी बेचते हैं। सावंत की नर्सरी से पौध लेने के लिए परभणी, बीड, उस्मानाबाद, बुलढाणा, कोल्हापुर, बीजापुर, बेलगाम आदि से लोग आते हैं।

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