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ईबादत घर मे करे

CITY REPORTER – MOHAMAD ZAFAR KHAN

कोरोना वायरस की चपेट में अब पूरी दुनिया आ चुकी है ऐसे में अब लोग एक जुट होकर इसके ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई लड़ रहे है , भारत एक ओस देश है जहाँ कई जाती धर्म और भाषा के लोग रहते है उन सभी को जोड़कर आज तक एक माला में रखा है हमारी संस्कृति ने । 


आज पूरी दुनिया  कोरोना  वायरस  से परेशान है । चीन के एक शहर वहां से निकला यह  वायरस  करीब १५० मुल्कों मैं फ़ैल चूका है। हमारे मुल्क भारत मैं  भी इसका असर देखने को मिल रहे है।


भारत मैं कई मज़हब कई तहजीब कई रस्मो मानने वाले लोग रहते है हर मज़हब का अपना-अपना  अक़ीदा है और हमारे मुल्क़ का संविधान इसकी  इजाज़त भी देता है। दुनिया मैं इंडोनेशिया के बाद  मुसलमानो की सबसे बड़ी आबादी भारत मैं रहती है। मुस्लमान दिन मैं पांच वक़्त नमाज पढ़ कर अपने  रब को याद करता है , नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद मैं  जाते है जिसे मुस्लिम भाई अल्लाह का घर भी कहते है।


कोरोना वायरस के चलते हिंदुस्तान में पूरी तरह लोकडाउन का ऐलान किया है जिसकी वजह से हर  मज़हब की इबादतगहो को बंद कर दिया गया है  ताकि कोरोना वायरस से लड़ा जा सके और ज़्यादा  से ज़्यादा लोगों को ये वायरस का शिकार होने से  रोका जा सके हुकूमत के इस फैसले पे लोगों ने सहमति जताई है तो कुछ ऐसे अब भी है जिन्हे इस बात से ऐतराज़ भी रहा है।


वैसे तो सभी मुस्लिम समाज के ओलेमा और मौलानाओं ने मस्जिदों में नमाज पढ़ना बंद कर दिया है सिर्फ अज़ान देते है और सभी से गुजारिश करते है कि अज़ान के बाद अपने घरों में ही नमाज पढ़े , आज तक कभी ऐसा नही हुआ कि जुम्मा की नमाज मस्जिद में नही हुई हो लेकिन ऐसा वक्क्त भी आया कि जुम्मा की अजान हुई और लोगो ने अपने घर मे ज़ोहर की नमाज अदा की।


कुछ ऐसे लोग अगर अब भी है जो इस बात को लेकर अड़े हुए है कि नमाज मस्जिद में पढ़ना है तो में आप को बताना चाहता हु की यह वायरस ना जात देखता है ना इंसान बस इसकी चपेट में आने वाला मौत की दहलीज तक पहुच जाता है।


कुछ लोगो का कहना है कि जो होगा देखा जाएगा जब तक अल्लाह नही चाहे उन्हें कुछ नही होगा तो में आप को बता दु की जब तक आप खुद की मदद नही करोगे तो अल्लाह भी आप की मदद नही करेगा। 
कई मुस्लिम उलेमा , मुफ़्ती और काज़ी ने कहा कि ऐसे मुश्किल दौर में अपने घरों में ही रहे जहाँ तक  अल्लाह पे भरोसे की बात है तो उलेमा ने हमारे पैगंबर का एक वाक्या का हवाला भी दिया जिसमे एक सख्स अपने ऊंट  से  उतरा  और  अपने  घर  की  तरफ  चलने लगा तो हुजूर ने उससे पूछा की तुमने अपने  ऊंट को बाँधा क्यों नहीं? तो उस शख्स ने कहा मुझे  अल्लाह पे भरोसा है। उस पर हुजूर ने कहा की पहले  अपने ऊंट को अच्छे से बांधो और फिर अल्लाह पे  भरोसा करो इसका मतलब ये है की अल्लाह पर  भरोसा करने से पहले हर इंसान को अपनी तरफ से  सारी ऐतिहात बरतना चाहिए उसके बाद अल्लाह पे  भरोसा करना चाहिए। उलेमा का कहना है की बिना  एतिहात बरतने वालो की मदद भी अल्लाह नही करता है और अपनी ला प्रवाही करते हुए सिर्फ  अल्लाह का इम्तिहान लेना एक गुनाह मैं शामिल होना जैसा है।


बढ़ते खतरे को देखते हुए सभी धर्मस्थलो को बंद कर दिया गया और मस्जिदों में नमाज नही हो रही है लोगो से अपील की जा रही है कि अपने घरों में रहे इसके बावजूद भी लोग तफ़री करने अपने घरों से बाहर निकल जाए रहे है ऐसे लोग अपने साथ साथ अपने घरवालों के लिए भी मुसीबत लेकर घर जा रहे है ऐसे लोगो से अपील है कि घर मे रहे और ईबादत करे इंशाल्लाह आलाह यह मुश्किल दौर भी दूर कर देगा ।

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